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यूक्रेनी युवक से रिश्ता बना तो मिली सजा! चीन में पीड़िता को ही यूनिवर्सिटी से निकालने पर बवाल

प्रतीकात्मक AI तस्वीर

प्रतीकात्मक AI तस्वीर

China News Today: चीन से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक यूनिवर्सिटी ने एक छात्रा को निजी जिंदगी में लिए गए फैसले पर सख्त सजा दी है. मामला चीन के डेलियन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी का है, जहां 21 साल की एक चीनी छात्रा को विदेशी युवक के साथ संबंध बनाने के आरोप में निष्कासित कर दिया गया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रा ने यूक्रेन के रहने वाले 37 साल के डेनिलो तेस्लेंको नाम के शख्स के साथ एक वन नाइट स्टैंड में हिस्सा लिया था. डेनिलो एक पूर्व ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ी हैं. इन दोनों की मुलाकात दिसंबर 2023 में एक इवेंट के दौरान हुई थी. बाद में डेनिलो ने छात्रा की कुछ निजी तस्वीरें अपने फैन ग्रुप में ऑनलाइन शेयर कर दीं, जिससे सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने लगा.

पीड़िता को ही बना दिया मुल्जिम

इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रा को "राष्ट्रीय गरिमा को ठेस पहुंचाने" के आरोप में 16 दिसंबर 2024 को निकालने की तैयारी की थी. यह बात 8 जुलाई को यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताई.

इस फैसले की चीन में जमकर आलोचना हो रही है. लोग कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी ने छात्रा के साथ दोहरा मापदंड अपनाया है, जबकि यूक्रेनी युवक की कोई जवाबदेही नहीं तय की गई. चीनी कानून के तहत यूनिवर्सिटी किसी छात्र को सिर्फ आठ तयशुदा वजहों से ही निष्कासित कर सकती है, लेकिन छात्रा का मामला उनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आता.

कानून विशेषज्ञों ने क्या कहा?

कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी छात्रों को चाइनीज नियमों के तह सिर्फ निश्चित श्रेणी में जुर्म करने पर ही निष्कासित कर सकती है. हालांकि, छात्रा का जुर्म इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आती है. फिलहाल पीड़ित छात्रा को 7 सितंबर तक अपील करने का अधिकार दिया गया है. वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता उसे कानूनी मदद लेने की सलाह दे रहे हैं.


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Written by: Raihan

17 Jul 2025  ·  Published: 06:03 IST

बिहार को मिली बड़ी सौगात: जमुई में स्थापित होगा राज्य का पहला गिद्ध संरक्षण केंद्र, देश में छठा

बिहार का पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र

बिहार का पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र

बिहार के जमुई जिले में राज्य का पहला और देश के केवल पांच प्रमुख केंद्रों में शामिल होने वाला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र स्थापित किया जा रहा है. तेजी से घट रही गिद्धों की आबादी को बचाने के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. 1990 के दशक के बाद डाइक्लोफेनाक जैसी दवाओं के कारण गिद्धों की संख्या 95% तक घट गई. ऐसे में जमुई में बनने वाला यह केंद्र इनकी प्रजनन क्षमता बढ़ाने, वैज्ञानिक संरक्षण और प्राकृतिक आवास सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा.

दरअसल जमुई जिले के झाझा प्रखंड स्थित नागी जलाशय क्षेत्र में गिद्ध संरक्षण सह प्रजनन केंद्र की स्थापना किया जाएगा. इसे लेकर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से अंतिम स्वीकृति मिल गई है. स्थानीय प्रशासन ने इस परियोजना को लेकर तैयारी तेज कर दी है और इसे देश का छठवां व बिहार का पहला प्रमुख गिद्ध संरक्षण केंद्र माना जा रहा है.

यहां दिखा था हिमालयन गिद्ध

जिला वन पदाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष ठंड और गर्मी के बीच हिमालयन ग्रीफन यानी हिमालयन गिद्ध का आगमन नागी क्षेत्र में दर्ज किया गया है जो अपने सामान्य आवास नेपाल, भूटान और तिब्बत से थोड़ा दक्षिण में आने लगा है. यह संकेत करता है कि यह इलाका उनके प्राकृतिक व्यवहार और जरूरतों के अनुरूप है. इसी वजह से विभाग ने यहां गिद्ध संरक्षण केंद्र बनाने का अंतिम निर्णय लिया है.

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने 2018 में भारत में पाए जाने वाले सभी गिद्ध प्रजातियों को दुर्लभ और विलुप्ति की श्रेणी में रखा था जिससे ऐसे केंद्रों की महत्ता और बढ़ जाती है. भारत में गिद्धों की नौ प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें भारतीय गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध, इजिप्टियन गिद्ध, स्लेंडर बिल्ड गिद्ध और लाल सिर वाले गिद्ध सहित अन्य प्रजातियां शामिल हैं.

केमिकल के कारण घट रहे हैं गिद्ध

जिला वन पदाधिकारी ने बताया कि गिद्धों की तेजी से घटती आबादी का मुख्य कारण मृत मवेशियों के मांस में मौजूद दर्द निवारक दवाओं के केमिकल को माना जाता है. पक्षी विशेषज्ञ अरविंद कुमार मिश्रा बताए हैं कि गिद्ध प्रकृति के सफाई कर्मी होते हैं और मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं. लेकिन वर्ष 1999 के बाद गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई क्योंकि मवेशियों को दी जाने वाली कुछ दवाओं के अवशेष उनके मांस में मौजूद रहते थे जिन्हें खाने से गिद्धों में किडनी फेल होने जैसी घातक स्थितियां उत्पन्न होती थीं. 


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Written by: Dhirendra Mishra

28 Nov 2025  ·  Published: 07:26 IST

ओवैसी की एंट्री से ‘INDIA’ बेचैन, मुस्लिम वोट बैंक पर RJD-Congress की पकड़ ढीली?

असदुद्दीदन ओवैसी

असदुद्दीदन ओवैसी

बिहार की सियासत में ओवैसी की एंट्री ने नया समीकरण खड़ा कर दिया है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) जिस तरह सीमांचल और मुस्लिम बहुल इलाकों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, उसने ‘INDIA गठबंधन’ की चिंता बढ़ा दी है. आरजेडी और कांग्रेस को हमेशा से मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा रहा है, लेकिन अब यह समर्थन खिसकने का खतरा मंडरा रहा है. यही वजह है कि ओवैसी की सक्रियता को गठबंधन खेमे में बेचैनी के तौर पर देखा जा रहा है.

गठबंधन की राजनीति में राजनीतिक दल अपना कुनबा बढ़ाने में लग रहते हैं. लेकिन, शायद बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक एकमात्र ऐसा गठबंधन है, जो एआईएमआईएम के खुले ऑफर से भी घबरा गया है. पिछले बिहार चुनाव में हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी सीमांचल की पांच सीटें जीती थी. यह भी इस बात का प्रमाण है कि यह ऑफर किसी पर बोझ बनने की बात नहीं है, बल्कि उनके पास बिहार में जनाधार भी है. लेकिन, जिस तरह आरजेडी इस ऑफर से पीछा छुड़ाने में लगी है, उससे उसके अपने कोर वोट बैंक छिटकने का डर जाहिर हो रहा है.

सीमांचल में ओवैसी का जनाधार

बिहार चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी एक फैक्टर रहेगी, इसमें कोई दुविधा नहीं है. खासकर सीमांचल क्षेत्र में ओवैसी का अपना एक जनाधार स्थापित हुआ है. मौजूदा विधानसभा में उसके पांच में से चार विधायकों को भले ही आरजेडी अपने में मिला चुकी हो, लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी चीफ का प्रभाव मौजूद है, खासकर मुस्लिम युवाओं में. सीमांचल के चार जिलों- पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया में 24 असेंबली सीटें हैं और यह राज्य में 70 प्रतिशत मुस्लिम वाले वाले सीटों में शामिल हैं.

एआईएमआईएम के बचे हुए एकमात्र विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम पार्टी को बिहार में इंडिया ब्लॉक (महागठबंधन) का हिस्सा बनाने के लिए आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव से मुलाकात की कोशिश भी कर चुके हैं, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए. 2015 में पार्टी बिहार में 6 सीटें लड़ी थी, लेकिन सब हार गई, लेकिन, 2020 में इसे बहादुरगंज, जोकीहाट, अमौर, कोचाधामन और बैसी में सफलता मिली. इसकी वजह से इन पांचों सीटों पर महागठबंधन और एनडीए दोनों को ही हार का सामना करना पड़ा.

'लालू यादव ने गेट भी नहीं खोला'

एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम ने द हिंदू को बताया है कि 'मैं बिहार में एआईएमआईएम को इंडिया ब्लॉक में शामिल कराने की मांग को लेकर लालू के आवास पर गया था. हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि सेक्युलर वोट नहीं बटना चाहिए और इसीलिए हम महागठबंधन का हिस्सा बनना चाहते हैं. 'वे बोले, 'मैं लालू जी के आवास पर गया, लेकिन उन्होंने गेट तक नहीं खोला और मुझसे कोई नहीं मिला. अगर आरजेडी का रवैया ऐसा रहेगा तो उन्हें आने वाले दिनों में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.'

'मुसलमानों का मसीहा बन जाएंगे'

पार्टी सूत्रों का कहना है कि एआईएमआईएम इसलिए इंडिया ब्लॉक का हिस्सा बनना चाहती है, क्योंकि इससे सीमांचल में महागठबंधन की जीत की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. जानकारी के मुताबिक ओवैसी की पार्टी क्षेत्र की सिर्फ 6 सीटें मांग रही थी, लेकिन आरजेडी और कांग्रेस के नेता पार्टी के साथ किसी भी तरह से दिखने में घबरा रहे हैं. एक वरिष्ठ आरजेडी नेता के मुताबिक, 'एक बार हमने एआईएमआईएम को अपने गठबंधन का हिस्सा बना लिया तो हमारे लिए बहुत दिक्कत हो जाएगी, क्योंकि वे अपनी जगह बना लेंगे. 

अगर उन्होंने इंडिया ब्लॉक में रहकर उन पांचों सीटों को जीत लिया तो हम कैसे दावा कर पाएंगे कि मुसलमानों के मसीहा हम ही हैं? हम उन्हें क्रेडिट नहीं देना चाहते. कांग्रेस पहले ही हमारे साथ है. एआईएमआईएम को ऐसी पार्टी के रूप में देखा जाता है, जो आरएसएस और बीजेपी की तरह वोटों का ध्रुवीकरण करती है. उनमें कोई अंतर नहीं है.'

तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद

2023 के बिहार जाति जनगणना के हिसाब से राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 47 पर मुस्लिम वोटर निर्णायक रोल में हैं. 11 सीटों पर तो 40 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान हैं. सीमांचल के कुछ हिस्सों में मुस्लिम वोट बैंक तो 70 प्रतिशत भी ज्यादा है. महागठबंधन में जगह नहीं मिलने पर एआईएमआईएम तीसरा मोर्चा बनाकर करीब 100 सीटों पर लड़ने का विचार कर रहा है. पार्टी का आरोप है कि आरजेडी को मुस्लिम वोट तो चाहिए, लेकिन इसे मुस्लिम नेतृत्व से परहेज है. बिहार की 13 करोड़ आबादी में मुसलमान 17.7 फीसदी हैं और एआईएमआईएम इसी को अपनी चुनावी राजनीति का पूरा आधार बनाकर चल रही है.


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Written by: Dhirendra Mishra

16 Sep 2025  ·  Published: 05:50 IST

RJD नेता IP गुप्ता का आपत्तिजनक बयान वायरल, विपक्ष ने कहा - ‘तेजस्वी बताएं, यही है उनकी राजनीति?’

आरजेडी नेता और तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी IP गुप्ता

आरजेडी नेता और तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी IP गुप्ता

बिहार की सियासत में एक बार फिर जुबानी जंग छिड़ गई है. इस बार विवाद का कारण बने हैं आरजेडी नेता और तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी IP गुप्ता, जिन्होंने अपने बयान से राजनीतिक हलचल मचा दी है. दरअसल, बिहार के सहरसा से महागठबंधन के प्रत्याशी और इंडियन इनक्लूसिव पार्टी (IIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आईपी गुप्ता का एक विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. पार्टी के एक कार्यक्रम में अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कुछ ऐसी बात कही जो सियासत और समाज दोनों में तीखी प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकती है.

कार्यक्रम में उन्होंने अलग‑अलग जातियों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर यादव या कोई और लाठी मारता है तो विरोध में 'गला में दांत फंसा कर मार दो'. इस तरह की उकसाने वाली बात का वीडियो कल से तेजी से इंटरनेट पर फैल रहा है.

आईपी गुप्ता ने चुनावी माहौल में दिया भड़काऊ बयान

वीडियो के अनुसार, आईपी गुप्ता ने कई जातियों का नाम लेकर हमला कैसे करना है, यह बताते हुए उकसाने वाला संदेश दिया. उनके इस संदर्भित भड़काऊ बयान ने जिले में चिंता और नाराजगी बढ़ा दी है. सामाजिक मंचों पर वीडियो के साझा होते ही कई लोगों ने इसे निंदनीय और खतरनाक बताया है जबकि कुछ समर्थकों ने उनके कथन का अलग संदर्भ होने का दावा किया है.

 शांति भंग करने का खतरा

राजनीतिक माहौल में ऐसे बयान पर सवाल खड़े होते हैं क्योंकि चुनावी समय में आग लगाने वाले भाषण समुदायों के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं. सहरसा जैसे संवेदनशील इलाकों में नेताओं के सार्वजनिक बयानों का व्यापक प्रभाव रहता है और साम्प्रदायिक या जातिगत भावनाओं को भड़काने वाले वाक्यों से नजदीकी इलाके में सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा रहता है.

इस तरह के बयानों की तत्काल हो जांच- राजनीतिक पर्यवेक्षक

स्थानीय जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस तरह के बयानों की तत्काल जांच होनी चाहिए ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे. वीडियो वायरल होने के बाद शांति प्रेमी नागरिकों ने संयम बनाए रखने और कानून के तहत कार्रवाई की अपील की है. कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस और चुनाव प्राधिकरण से आग्रह किया है कि वह मामले की तह तक जाकर जांच करें और आवश्यकतानुसार कार्यवाही करें.

आईपी गुप्ता ने नहीं दी सफाई 

आईपी गुप्ता या उनकी पार्टी की ओर से इस वायरल बयान पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं हुआ है. मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी. खासकर चुनावी माहौल में ऐसी हरकतों के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं. सहरसा प्रशासन और जिला पुलिस से भी उम्मीद की जा रही है कि वे स्थिति पर नजर रखेंगे और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखेंगे.


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Written by: Dhirendra Mishra

19 Oct 2025  ·  Published: 10:12 IST